घर की दीवारों पर स्वतः निकलने वाले पीपल के छोटे वृक्ष एक संकेत माने जाते हैं। सामान्यतः चिड़ियाँ अपने मुख में बीज लेकर इधर-उधर गिरा देती हैं, जिससे वे उग जाते हैं। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि ये हर भवन में नहीं उगते; कभी-कभी तो सीमेंट वाली दीवारों पर भी निकल आते हैं।
ऐसी मान्यता है कि पीपल के वृक्ष पर पितृ (दिवंगत आत्माएँ) तथा ब्रह्म देव का वास होता है।
घर के दीवारों पर स्वतः पीपल बार बार निकलना इस बात का संकेत माना जाता है कि आपके पूर्वज, पितृ में से कोई मुक्ति हेतु आपसे सहायता चाहता है। यह एक सांकेतिक, निमित्त ज्ञान भर है। आपके परिवार में पितृ दोष है या नहीं इसको आपके नाम, परिवारजन के नाम से, घर की वास्तु से, कुंडली से सभी प्रकार से देखा जाता है। 2 या 3 जगह दोष दिखने और घटनाओं के आधार पर यह संभावना व्यक्त की जा सकती है।
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★ उपाय ★
सबसे पहले, हिंदू मान्यताओं के अनुसार अपने पूर्वजों की मोक्ष और मुक्ति हेतु बताए गए विधि-विधान अवश्य करें।
यदि वर्तमान या पिछली दो पीढ़ियों में किसी की अकाल मृत्यु हुई हो और परिवार में रोग, शोक या आर्थिक कष्ट जैसे गंभीर लक्षण हों, तो त्रिपिंडी श्राद्ध या नारायण बलि जैसे विशेष पूजन कराए जा सकते हैं।
यदि आर्थिक अभाव हो, तो सामान्य तर्पण प्रतिदिन जल द्वारा किया जा सकता है।
अमावस्या के दिन घर के दक्षिण-पश्चिम कोने में सूखे नारियल के गोले को गाय के घी और कपूर के साथ प्रज्वलित करें तथा महाकाल या भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।
अमावस्या के दिन एक दोने में पाँच रंगों की मिठाई और जल रखकर दक्षिण-पश्चिम दिशा में पितरों के नाम अर्पित करें।
यदि कुछ और संभव न हो, तो प्रतिदिन पूजा, मंदिर या व्रत के समय केवल यह प्रार्थना करें:
“हे प्रभु, मेरी इस पूजा का पुण्य मेरे पूर्वजों को समर्पित है। कृपया उन्हें मोक्ष और मुक्ति प्रदान करें।”
शनिवार या अमावस्या के दिन एक कटोरी जल में काले तिल डालें और निम्न मंत्र का 108 बार जाप करते हुए पितरों हेतु अर्पित करें:
ॐ सर्व पितृभ्यो नमः तर्पयामि
★ पीपल के पौधे को हटाने की विधि ★
सबसे पहले ऊपर बताए गए किसी भी उपाय के माध्यम से अपने पूर्वजों से क्षमा याचना करें और उन्हें पूजन या तर्पण अर्पित करें।
इसके बाद पीपल के पौधे के पास जाकर जल वाला नारियल लें और प्रार्थना करें:
“हे वृक्ष देव और इस वृक्ष में निवास करने वाले सभी देवगण, यह भवन मेरे जीवन-यापन हेतु है। यहाँ आपकी पवित्रता बनाए रखना कठिन है। आपसे विनम्र निवेदन है कि इस वृक्ष पर निवासरत सभी देवता कृपया अन्य स्थान पर प्रस्थान करें। आपकी आज्ञा से मैं इस पौधे को किसी अन्य स्थान पर स्थापित करूँगा। सम्मानपूर्वक आपके चरणों में यह श्रीफल अर्पित कर रहा हूँ, कृपया इसे स्वीकार करें।”
पौधे के पास पीली सरसों के ऊपर नारियल को कम से कम 12 घंटे तक रखें। अगले दिन उसे किसी बड़े पीपल वृक्ष, नदी, सरोवर या मंदिर में प्रवाहित कर दें।
इसके बाद पौधे को इस प्रकार निकालने का प्रयास करें कि वह सुरक्षित रहे और उसे किसी अन्य स्थान पर लगा दें। यदि पितृ दोष अधिक हो, तो उसे श्मशान भूमि में लगाएँ, अन्यथा शिव मंदिर या पार्क में भी लगा सकते हैं।
यदि पौधा बार-बार उगता रहे, तो आप वहाँ लिक्विड मर्करी इंजेक्ट करने (सावधानी पूर्वक क्योंकि यह जहरीली होती है) या पीला गंधक, नमक तथा चूना छिड़क सकते हैं।
यदि किसी कारण पौधा नष्ट हो जाए, तो उसके स्थान पर शुभ नक्षत्र में तीन पीपल के वृक्ष श्मशान भूमि, मंदिर या पार्क में लगाएँ।
पौधे को निकालते समय इस मंत्र का जाप करें:
ॐ ह्रीं क्षौं फट् स्वाहा
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